Shayari Blog Imam Hussain Shayari करबला की सच्चाई, सब्र और कुर्बानी को समर्पित दो-सतरी अश'आर। करबला ...
करबला का वाक़या सिर्फ़ इतिहास का एक पन्ना नहीं, बल्कि सच्चाई और हक़ के लिए डटे रहने की सबसे बड़ी मिसाल है। इमाम हुसैन (अ.स.) ने जो कुर्बानी दी, वो आज भी हर दिल को झकझोर देती है और इंसानियत को सही राह दिखाती है।
मुहर्रम की हर याद के साथ करबला की तपती रेत, प्यासे लब और अटूट ईमान की कहानी ज़िंदा हो उठती है। यह शायरी उसी सब्र और वफ़ादारी को शब्दों में समेटने की एक छोटी सी कोशिश है।
अगर आप भी मुहर्रम के मौके पर या यूं ही अपने दिल की अकीदत ज़ाहिर करने के लिए ऐसी लाइनें ढूंढ रहे हैं जो हुसैनियत की शान को बयां करें, तो यह कलेक्शन आपके लिए है।
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