Shayari Blog Best Matlabi Log Shayari: 75+ Handpicked Lines for 2026 मतलबी दुनिया की सच्चाई — दो लाइनों में बयां हर ...
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Best Matlabi Log Shayari: 75+ Handpicked Lines for 2026
मतलबी दुनिया की सच्चाई — दो लाइनों में बयां हर एहसास
आज की दुनिया में सबसे कड़वी सच्चाई यही है कि ज़्यादातर रिश्ते ज़रूरत की भाषा समझते हैं। जब तक काम निकलता है, तब तक साथ; काम निकलते ही चेहरे बदल जाते हैं। यह दर्द हर किसी ने कभी ना कभी महसूस किया है।
मतलबी लोगों की पहचान करना आसान नहीं होता, क्योंकि वो मीठी बातों के पीछे स्वार्थ छुपाकर रखते हैं। सच्चाई सामने आने में वक्त लगता है, पर जब आती है तो भरोसा हमेशा के लिए हिल जाता है।
यह 75+ शायरियों का संग्रह उन सभी दिलों के लिए है जिन्होंने मतलबी रिश्तों का दर्द सहा है — जिन्होंने सच्चा साथ दिया, पर बदले में सिर्फ स्वार्थ पाया।
The Collection
01 / 75
काम निकलते ही पहचान भूल गए,
यही तो असली औकात दिखा गए।
यही तो असली औकात दिखा गए।
02 / 75
मतलब से रिश्ता निभाना सीख गए हो,
दिल से नहीं, फ़ायदे से जीना सीख गए हो।
दिल से नहीं, फ़ायदे से जीना सीख गए हो।
03 / 75
ज़रूरत तक अपना कहते रहे तुम,
ज़रूरत बीती तो बेगाना कहा तुमने।
ज़रूरत बीती तो बेगाना कहा तुमने।
04 / 75
दोस्ती नहीं थी वो, सौदा था बस,
अब समझ आया हर वादा झूठा था बस।
अब समझ आया हर वादा झूठा था बस।
05 / 75
जिसे दिल से अपनाया था हमने,
वो बस मतलब का यार निकला।
वो बस मतलब का यार निकला।
06 / 75
फ़ायदे तक साथ निभाया तुमने,
बाकी सब झूठा दिखाया तुमने।
बाकी सब झूठा दिखाया तुमने।
07 / 75
सच्चे दिल से साथ दिया था हमने,
बदले में बस धोखा पाया हमने।
बदले में बस धोखा पाया हमने।
08 / 75
जो सिर्फ फ़ायदे में साथ रहे,
वो मतलबी रिश्ते कहलाए सदा।
वो मतलबी रिश्ते कहलाए सदा।
09 / 75
अपनेपन का मुखौटा पहन के आए थे,
असल में बस मतलब लेने आए थे।
असल में बस मतलब लेने आए थे।
10 / 75
जब तक फ़ायदा था तब तक अपना कहा,
अब मुड़कर भी ना देखा तुमने।
अब मुड़कर भी ना देखा तुमने।
11 / 75
दिल दिया था बिना किसी शर्त के,
बदले में मिला बस स्वार्थ ही स्वार्थ।
बदले में मिला बस स्वार्थ ही स्वार्थ।
12 / 75
जो मतलब निकलते ही बदल जाए,
वो रिश्ता नहीं, बस नाटक कहलाए।
वो रिश्ता नहीं, बस नाटक कहलाए।
13 / 75
तुम्हारा साथ शर्तों पे टिका था,
हमारा साथ सच्चा और बेशर्त था।
हमारा साथ सच्चा और बेशर्त था।
14 / 75
जिसे अपना समझ के भरोसा किया,
उसने बस अपनी ज़रूरत को जिया।
उसने बस अपनी ज़रूरत को जिया।
15 / 75
मतलबी रिश्तों की यही पहचान है,
काम निकलते ही खत्म हर बयान है।
काम निकलते ही खत्म हर बयान है।
16 / 75
स्वार्थ ढूंढने वाले रिश्तों से,
बेहतर है तन्हा रहना इस जहां से।
बेहतर है तन्हा रहना इस जहां से।
17 / 75
जिसने सिर्फ लेना सीखा हो,
वो साथ निभाना कभी ना सीखा हो।
वो साथ निभाना कभी ना सीखा हो।
18 / 75
वक्त पड़ने पे साथ ना जो दे,
वो रिश्ता सिर्फ मतलब का ही रहे।
वो रिश्ता सिर्फ मतलब का ही रहे।
19 / 75
जो रिश्ता सिर्फ फ़ायदे से जुड़ा हो,
वो कभी दिल से जुड़ा ना हो।
वो कभी दिल से जुड़ा ना हो।
20 / 75
सच्चा साथी तलाशा था हमने,
मिला बस मतलब का सौदा हमने।
मिला बस मतलब का सौदा हमने।
21 / 75
जो सिर्फ ज़रूरत में याद आए,
वो अपना नहीं, इस्तेमाल कहलाए।
वो अपना नहीं, इस्तेमाल कहलाए।
22 / 75
भरोसा टूटा तो समझ आया,
तुम्हारा अपनापन बस मतलब का साया।
तुम्हारा अपनापन बस मतलब का साया।
23 / 75
जो रिश्ता सिर्फ लेन-देन पे टिके,
वो कभी दिल से ना निभे।
वो कभी दिल से ना निभे।
24 / 75
मतलबी दुनिया में सच्चा साथी ढूंढा,
पर मिला बस स्वार्थ का हर एक चेहरा।
पर मिला बस स्वार्थ का हर एक चेहरा।
25 / 75
पीठ पीछे बुराई करते हैं जो,
सामने आते ही मीठा बोलते हैं वो।
सामने आते ही मीठा बोलते हैं वो।
26 / 75
जिस दिन काम ना आया कोई,
उस दिन पहचान भी भूल गए वो।
उस दिन पहचान भी भूल गए वो।
27 / 75
मीठी बातों में स्वार्थ छुपाया तुमने,
असली रंग बाद में दिखाया तुमने।
असली रंग बाद में दिखाया तुमने।
28 / 75
जो सिर्फ अपने फ़ायदे की सोचे,
वो कभी किसी का सगा ना होए।
वो कभी किसी का सगा ना होए।
29 / 75
हमदर्दी दिखाना आसान है सबको,
साथ निभाना मुश्किल है सबसे।
साथ निभाना मुश्किल है सबसे।
30 / 75
जो वक्त पड़ने पे मुंह मोड़ ले,
वो अपना कहलाने का हक़ ना रखे।
वो अपना कहलाने का हक़ ना रखे।
31 / 75
दिखावे का प्यार बहुत देखा हमने,
असली सूरत भी पहचानी हमने।
असली सूरत भी पहचानी हमने।
32 / 75
जो सिर्फ तारीफ़ से खुश हो जाए,
असली सच्चाई से वो भाग जाए।
असली सच्चाई से वो भाग जाए।
33 / 75
स्वार्थी दुनिया की यही रीत है,
ज़रूरत तक ही सबकी प्रीत है।
ज़रूरत तक ही सबकी प्रीत है।
34 / 75
जो मुसीबत में साथ छोड़ जाए,
वो दोस्त नहीं, अजनबी कहलाए।
वो दोस्त नहीं, अजनबी कहलाए।
35 / 75
झूठी हमदर्दी से बेहतर है तन्हाई,
कम से कम धोखे की गुंजाइश ना पाई।
कम से कम धोखे की गुंजाइश ना पाई।
36 / 75
काम निकालना जिनको आता है,
रिश्ता निभाना उनको नहीं आता है।
रिश्ता निभाना उनको नहीं आता है।
37 / 75
जो अपने फ़ायदे में रिश्ते तोले,
वो कभी दिल से बात ना बोले।
वो कभी दिल से बात ना बोले।
38 / 75
सच्चाई कड़वी होती है मानो या ना मानो,
मतलबी लोग हर मोड़ पे मिलते हैं जानो।
मतलबी लोग हर मोड़ पे मिलते हैं जानो।
39 / 75
जिसने वक्त पे साथ छोड़ दिया,
उसने अपना असली रूप दिखा दिया।
उसने अपना असली रूप दिखा दिया।
40 / 75
दुनिया में सच्चे रिश्ते कम मिलते हैं,
मतलबी चेहरे हर तरफ दिखते हैं।
मतलबी चेहरे हर तरफ दिखते हैं।
41 / 75
अपनों की भीड़ में भी तन्हा हुए हम,
मतलबी दुनिया को पहचान गए हम।
मतलबी दुनिया को पहचान गए हम।
42 / 75
जो हर बात में अपना फ़ायदा ढूंढे,
वो दोस्ती का हक़दार नहीं होता।
वो दोस्ती का हक़दार नहीं होता।
43 / 75
रिश्ते निभाना सबके बस की बात नहीं,
मतलब निकालना सबको आता सही।
मतलब निकालना सबको आता सही।
44 / 75
जो सिर्फ मौके का फ़ायदा उठाए,
वो सच्चा रिश्तेदार कभी ना कहलाए।
वो सच्चा रिश्तेदार कभी ना कहलाए।
45 / 75
अच्छे दिनों में भीड़ लगी थी हमारे इर्द,
बुरे वक्त में कोई ना आया नज़दीक।
बुरे वक्त में कोई ना आया नज़दीक।
46 / 75
जो अपने मतलब के लिए झुक जाए,
वो इज़्ज़त का हक़दार नहीं होता।
वो इज़्ज़त का हक़दार नहीं होता।
47 / 75
रिश्तों में जब स्वार्थ आ जाता है,
प्यार का हर रंग फीका पड़ जाता है।
प्यार का हर रंग फीका पड़ जाता है।
48 / 75
जो सिर्फ अपने काम की सोचे,
वो कभी किसी का दर्द ना समझे।
वो कभी किसी का दर्द ना समझे।
49 / 75
मतलबी लोग पहचानना मुश्किल है,
पर वक्त सब सिखा देता है आखिरकार।
पर वक्त सब सिखा देता है आखिरकार।
50 / 75
जिस दिन ज़रूरत खत्म हो जाती है,
उस दिन पहचान भी मिट जाती है।
उस दिन पहचान भी मिट जाती है।
51 / 75
दिल से जुड़े रिश्ते कम ही मिलते हैं,
बाकी सब मतलब से ही चलते हैं।
बाकी सब मतलब से ही चलते हैं।
52 / 75
जो सिर्फ फ़ायदे में मुस्कुराए,
वो नुकसान में मुंह फेर जाए।
वो नुकसान में मुंह फेर जाए।
53 / 75
अपनों से ज़्यादा दर्द कोई नहीं देता,
जब उनकी नीयत में स्वार्थ छुपा होता।
जब उनकी नीयत में स्वार्थ छुपा होता।
54 / 75
जो सिर्फ मीठी बातों से जीतें दिल,
असल में वो सबसे बड़े मतलबी होते हैं।
असल में वो सबसे बड़े मतलबी होते हैं।
55 / 75
तकलीफ़ में साथ छोड़ने वालों को,
खुशी में भी याद ना करना चाहिए।
खुशी में भी याद ना करना चाहिए।
56 / 75
जो रिश्ते सिर्फ पैसों पे टिके हों,
वो पैसे खत्म होते ही टूट जाते हैं।
वो पैसे खत्म होते ही टूट जाते हैं।
57 / 75
मतलबी लोग हर जगह मिल जाएंगे,
बस पहचानने की समझ होनी चाहिए।
बस पहचानने की समझ होनी चाहिए।
58 / 75
जो सिर्फ अपनी तरक्की में खुश हो,
दूसरों के दर्द से बेखबर वो रहता है।
दूसरों के दर्द से बेखबर वो रहता है।
59 / 75
रिश्तों में जब गिनती होने लगे,
समझ लो वहां स्वार्थ पनपने लगे।
समझ लो वहां स्वार्थ पनपने लगे।
60 / 75
जो सिर्फ अपनी बात मनवाना जाने,
वो सच्चा रिश्ता कभी ना निभाए।
वो सच्चा रिश्ता कभी ना निभाए।
61 / 75
दुनिया की भीड़ में सब अपने लगते हैं,
वक्त पड़ने पे असली चेहरे दिखते हैं।
वक्त पड़ने पे असली चेहरे दिखते हैं।
62 / 75
जो सिर्फ फ़ायदे के लिए नज़दीक आए,
वो नुकसान में सबसे पहले भाग जाए।
वो नुकसान में सबसे पहले भाग जाए।
63 / 75
अपनी ज़रूरत के लिए झुकने वाले,
ज़रूरत पूरी होते ही आंखें फेर लेते हैं।
ज़रूरत पूरी होते ही आंखें फेर लेते हैं।
64 / 75
जो सिर्फ लेने की आदत रखे,
देने की बारी में गायब हो जाए।
देने की बारी में गायब हो जाए।
65 / 75
स्वार्थी दुनिया में सच्चाई ढूंढना,
रेत में हीरा ढूंढने जैसा है सही।
रेत में हीरा ढूंढने जैसा है सही।
66 / 75
जो हर रिश्ते में मुनाफ़ा ढूंढे,
वो कभी सच्चा नाता ना बनाए।
वो कभी सच्चा नाता ना बनाए।
67 / 75
भरोसा टूटा तो सबक भी मिला,
हर मुस्कुराते चेहरे पे यकीन ना करना।
हर मुस्कुराते चेहरे पे यकीन ना करना।
68 / 75
जो सिर्फ अपने स्वार्थ की भाषा समझे,
वो प्यार की भाषा कभी ना जाने।
वो प्यार की भाषा कभी ना जाने।
69 / 75
मतलबी लोगों से दूरी अच्छी है,
टूटे दिल से बेहतर है तन्हाई सही।
टूटे दिल से बेहतर है तन्हाई सही।
70 / 75
जो सिर्फ अपने काम से मतलब रखे,
वो रिश्तों की कदर कभी ना जाने।
वो रिश्तों की कदर कभी ना जाने।
71 / 75
दिखावे की दुनिया में सच्चा कौन,
यह पहचानना अब मुश्किल हो गया।
यह पहचानना अब मुश्किल हो गया।
72 / 75
जो सिर्फ अपनी ज़रूरत के लिए बोले,
उसकी बातों में सच्चाई कम होती है।
उसकी बातों में सच्चाई कम होती है।
73 / 75
वक्त ने सिखाया है यह सबक हमें,
हर चेहरा अपना नहीं होता यहां।
हर चेहरा अपना नहीं होता यहां।
74 / 75
स्वार्थ से भरी इस दुनिया में हमने,
सच्चे दिल की कदर करना सीखा है।
सच्चे दिल की कदर करना सीखा है।
75 / 75
मतलबी लोगों को पहचान गए हम,
अब सिर्फ अपनों की कदर करते हैं हम।
अब सिर्फ अपनों की कदर करते हैं हम।

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