— Shayari Blog — हरियाणवी एटिट्यूड शायरी माटी की खुशबू, जुबान की धार — यो सै हरियाणे का असली अंदाज़। हरिया...
हरियाणवी एटिट्यूड शायरी
माटी की खुशबू, जुबान की धार — यो सै हरियाणे का असली अंदाज़।
हरियाणवी बोली की अपणी ए एक अलग ठसक सै — सीधी बात, बिना लाग-लपेट के। इस माटी के लोगां का अंदाज़ भी वैसा ए है, ना किसे के आगै झुकणा, ना किसे तै डरणा।
यो एटिट्यूड घमंड कोनी, यो सै अपणी पहचान पै भरोसा। जो अपणी जड़ां तै जुड्या रहवै सै, वोए असली शान लिए घूमै सै। दिल का साफ, जुबान का पक्का — यो सै हरियाणे की पहचान।
यो पोस्ट उन सारया खात्तर सै जो अपणी माटी और अंदाज़ पै नाज़ करैं सैं। नीचे दी शायरियां मौलिक सैं और उस्से जज़्बे नै शब्दां म्ह पिरोवैं सैं।
माटी सां जुड्या रहूं सूं म्है सदा,
यो हरियाणा सै मेरा असली पता।
ना डरूं किसे तै, ना झुकूं किसे कै आगै,
म्हारा अंदाज़ अपणा सै, बणा रहूं सूं म्है इस भागै।
जुबान सै सीधी, दिल सै साफ मेरा,
यो हरियाणा सै अंदाज़ सबतैं जुदा मेरा।
कोए कहवै कुछ भी, म्हारे तै फर्क कोनी,
अपणी शान म्ह जीणा, यो म्हारी पहचान सै कोए।
खेत-खलिहान म्ह पली सै म्हारी शान,
हरियाणे की माटी सै म्हारी असली जान।
मेहनत सै म्हारा नाम बण्या सै,
यो हरियाणे का जज़्बा हर घर म्ह पल्या सै।
ना बदलूं म्है अपणी बोली, अपणा अंदाज़,
यो सै म्हारी असली पहचान, यो सै म्हारा राज़।
जो टकराया म्हारे तै बेवजह कदे,
हरियाणे का जोश दिखा दूं उसनै फेर।
चूल्हे-चौंकी की खुशबू सै अनमोल,
माटी की महक सै म्हारे शब्दां का घोल।
हार मानणा म्हारी फितरत म्ह कोनी,
हरियाणे का खून सै, रुकणा जाणै कोनी।
दुनिया की बात्तां की परवाह कोनी,
म्हारा रस्ता म्हारा सै, तुलना कोनी।
माटी का बेटा सूं, माटी का बेटा रहूंगा,
हरियाणे की शान नै हमेशा गा के कहूंगा।
म्हारी चुप्पी नै कमजोरी ना समझ लियो,
तूफान भी म्हारी शांति तै डरै सै, यो जान लियो।
कुश्ती के अखाड़े म्ह सीखी सै हिम्मत,
हरियाणे का जोश सै म्हारी असली दौलत।
ना डरूं म्है टीका-टिप्पणी तै कदे,
म्हारा काम ए जवाब दे दे उसनै फेर।
अपणी माटी का मान बणा के रखूंगा,
हरियाणे का नाम हमेशा ऊंचा राखूंगा।
जो समझै ना म्हारी बोली, म्हारा अंदाज़,
उस तै मतलब कोनी, यो सै म्हारा राज़।
मेहनत करूं सूं, नतीजे की फिकर कोनी,
हरियाणे का जज़्बा सै, रुकणा जाणै कोनी।
दिल सै साफ सूं, जुबान सै तीखा भी सूं,
यो हरियाणे का असली बेटा सूं।
कोए भी हाल हो, हार ना मानूंगा,
माटी की शान नै आगै बढ़ाऊं जाणूंगा।
म्हारी शान सै म्हारी अपणी पहचान,
हरियाणे का हूं, इस्से म्ह सै म्हारी शान।
जित सूं भी जाऊं, माटी नै ना भूलूं,
हरियाणे का नाम ऊंचा राखूं, यो सै म्हारा फूल।

COMMENTS