— Shayari Blog — अटिट्यूड इग्नोर शायरी जो समझे ना कद्र, उसे नज़रअंदाज़ करना ही सही जवाब है। इग्नोर करना कम...
इग्नोर करना कमज़ोरी नहीं, बल्कि एक ताकत है। जब लोग आपकी अहमियत नहीं समझते, तो सबसे बड़ा जवाब होता है खामोशी — बिना कुछ कहे, बिना कोई सफाई दिए आगे बढ़ जाना।
हर किसी को जवाब देना ज़रूरी नहीं होता। कभी-कभी चुप रहना ही सबसे तीखा जवाब बन जाता है। जो आपकी इज़्ज़त नहीं करते, उन्हें इग्नोर करना ही असली एटिट्यूड है।
यह पोस्ट उन सभी के लिए है जो अपनी सेल्फ-रिस्पेक्ट से समझौता नहीं करते। नीचे दी गई ओरिजिनल शायरियां उसी बेपरवाह जज़्बे को शब्दों में पिरोती हैं।
जो कद्र न करे उसे इग्नोर करना सीख लिया,
खामोशी में ही जवाब छुपा दिया।
हर किसी को सफाई देना जरूरी नहीं,
जो समझे न मुझे, उससे कोई फिकर नहीं।
मेरी चुप्पी को कमजोरी मत समझना,
मेरा इग्नोर ही है मेरा असली जवाब।
जो इज़्ज़त नहीं देते, उनकी परवाह नहीं,
मेरा वक़्त कीमती है, बर्बाद नहीं।
जिसने पहचाना नहीं मेरी असली शान,
उसे इग्नोर करना है मेरा अरमान।
हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं,
कुछ लोग सिर्फ इग्नोर के काबिल हैं यही।
मैं किसी को साबित करने नहीं जीता,
मेरा इग्नोर ही है मेरा सबसे बड़ा सिक्का।
जो मुझे नज़रअंदाज़ करे, मैं भी करूं वही,
अपनी कीमत गंवाना मुझे मंजूर नहीं।
मेरी नज़रें अब उन पर नहीं टिकती,
जो मेरी अहमियत नहीं समझती।
जवाब देकर वक़्त बर्बाद नहीं करता,
इग्नोर करके ही असली सुकून पाता हूं।
मैं किसी की मंजूरी का मोहताज नहीं,
अपनी मर्ज़ी का मालिक हूं, नाराज़ नहीं।
जो लोग बदल जाएं वक़्त के साथ,
उन्हें इग्नोर करना ही है सही बात।
मेरी खामोशी में छुपा है गुरूर,
जिसे समझ न आए, वो रहे मुझसे दूर।
हर किसी को अपनी अहमियत नहीं देता,
जो कद्र न करे, उससे मुंह मोड़ लेता।
मैं भीड़ में शामिल होने नहीं आया,
जो न समझे मुझे, उसे नज़रअंदाज़ है पाया।
मेरा गुस्सा नहीं, मेरा इग्नोर डराता है,
जो समझ जाए, वही सच्चा साथी कहलाता है।
जो बिना वजह की बातें करते हैं,
मैं उन्हें भी बिना वजह इग्नोर करता हूं।
मेरी तवज्जो सस्ती नहीं है यार,
जो कद्र न करे, उसका नहीं इंतज़ार।
खामोश रहकर भी बहुत कुछ कह जाता हूं,
जो समझ जाए, उसी के साथ रह जाता हूं।
मेरी अनदेखी करने वालों को याद रखो,
एक दिन तुम भी इग्नोर होने का दर्द चखो।
बदलते रिश्तों से अब फर्क नहीं पड़ता,
इग्नोर करना अब मुझे अच्छे से आता।
जो मेरी वैल्यू नहीं समझ पाया कभी,
उसे इग्नोर करना ही सिखाया मुझे सही।

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