Shayari Blog Jaat Ki Attitude Shayari माटी का रंग, दिल का ठाठ — दो लाइनों म्ह अंदाज़ अंदाज़ ऐसा जो शब्द...
अंदाज़ ऐसा जो शब्दों की मोहताजी ना रखे — बस चाल और आत्मविश्वास ही सब कुछ बयां कर दे। यह वो स्वाभिमान और सादगी का मेल है जो मिट्टी से जुड़े लोगों की पहचान होती है, जहां रौब नहीं, असली मेहनत बोलती है।
यह अंदाज़ किसी को नीचा दिखाने का नहीं, बल्कि अपनी जड़ों पे गर्व करने का है। सीधी बात, पक्का इरादा और अपनी शर्तों पे जीना — यही असली अटीट्यूड है, जो दिखावे से नहीं, किरदार से झलकता है।
यह शायरी उन सभी के लिए है जो अपनी माटी और मेहनत पे नाज़ करते हैं — बिना किसी को नीचा दिखाए, बस अपने अंदाज़ में डटे रहते हैं।
The Collection
01 / 24
मिट्टी से जुड़े हैं, आसमान भी झुके,
यही तो अंदाज़ है हमारे माटी के।
यही तो अंदाज़ है हमारे माटी के।
02 / 24
रौब से नहीं, मेहनत से चलते हैं,
अपनी शर्तों पे ही जीना जानते हैं।
अपनी शर्तों पे ही जीना जानते हैं।
03 / 24
सीधी बात, पक्का इरादा है अपना,
झुकना सीखा ही नहीं है दिल ने।
झुकना सीखा ही नहीं है दिल ने।
04 / 24
माटी से रिश्ता है दिल का सच्चा,
यही तो है हमारी पहचान अच्छा।
यही तो है हमारी पहचान अच्छा।
05 / 24
खेतों की मिट्टी में पला ये जज़्बा,
हार ना मानना है असली मज़हब।
हार ना मानना है असली मज़हब।
06 / 24
चाल में गरूर नहीं, आत्मविश्वास है,
यही तो हमारा असली अंदाज़ है।
यही तो हमारा असली अंदाज़ है।
07 / 24
मेहनत हमारी पहचान बनी है,
दिखावे से हमको कभी ना गरज है।
दिखावे से हमको कभी ना गरज है।
08 / 24
जड़ों पे गर्व है हमको सदा,
यही तो है हमारा असली नशा।
यही तो है हमारा असली नशा।
09 / 24
इज़्ज़त से जीना आता है हमें,
झुकना कभी भाता नहीं हमें।
झुकना कभी भाता नहीं हमें।
10 / 24
भीड़ में भी अलग पहचान बनाई,
यही तो है हमारी माटी की कमाई।
यही तो है हमारी माटी की कमाई।
11 / 24
काम बोलता है, बातें नहीं,
यही उसूल है हमारे यहां का सही।
यही उसूल है हमारे यहां का सही।
12 / 24
सादगी में भी शान है अपनी,
हर अंदाज़ है निराली अपनी।
हर अंदाज़ है निराली अपनी।
13 / 24
जो अपनी शर्तों पे जीता है सदा,
वही असली दिलदार कहलाता है।
वही असली दिलदार कहलाता है।
14 / 24
हार के भी सर ऊंचा रखा हमने,
यही तो असूल सीखा है हमने।
यही तो असूल सीखा है हमने।
15 / 24
रौशनी अपनी खुद बनाई हमने,
किसी की परछाई ना अपनाई हमने।
किसी की परछाई ना अपनाई हमने।
16 / 24
चुप रहकर भी असर छोड़ जाते हैं,
यही अंदाज़ माटी वाले कहलाते हैं।
यही अंदाज़ माटी वाले कहलाते हैं।
17 / 24
दिखावे से दूर, हकीकत के करीब,
यही अंदाज़ है हमारा अजीब।
यही अंदाज़ है हमारा अजीब।
18 / 24
अपनी माटी की खुशबू ना भूलें कभी,
यही तो है हमारी असली सल्तनत।
यही तो है हमारी असली सल्तनत।
19 / 24
मेहनत का पसीना ही गहना है हमारा,
दिखावे का ताज नहीं चाहिए हमारा।
दिखावे का ताज नहीं चाहिए हमारा।
20 / 24
वादे निभाना खून में है हमारे,
यही सिखाया माटी ने हमें प्यारे।
यही सिखाया माटी ने हमें प्यारे।
21 / 24
रुतबा शब्दों से नहीं, किरदार से बनता,
यही फ़र्क माटी वालों में रहता।
यही फ़र्क माटी वालों में रहता।
22 / 24
जो चलते हैं अपनी राह पे सदा,
भीड़ खुद देती है उनको रास्ता।
भीड़ खुद देती है उनको रास्ता।
23 / 24
ना ताज चाहिए, ना कोई सिंहासन,
बस अपनी माटी ही काफ़ी है दर्शन।
बस अपनी माटी ही काफ़ी है दर्शन।
24 / 24
माटी का अंदाज़ खून में होता है,
ना ओढ़ने से, ना पहनने से होता है।
ना ओढ़ने से, ना पहनने से होता है।

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