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Matlabi Paise Ki Duniya Hai Shayari
जहां रिश्ते भी पैसों से नापे जाते हैं — दिल को छू लेने वाली दो लाइनें।
आज की दुनिया में **रिश्तों की कीमत** भी पैसों से आंकी जाने लगी है। जब तक जेब भरी है, तब तक सब अपने लगते हैं — खाली होते ही वही चेहरे पराए बन जाते हैं। यही इस दौर की सबसे बड़ी सच्चाई है।
पहले लोग रिश्ते निभाते थे, अब **फायदा देखकर** रिश्ते बनाते हैं। जिस दिन आपकी ज़रूरत खत्म हो जाती है, उसी दिन आपकी अहमियत भी खत्म हो जाती है — यही मतलबी दुनिया का असली चेहरा है।
यह कलेक्शन उन सभी अनुभवों को समेटे है जो हमने इस **स्वार्थी दुनिया** में महसूस किए हैं — दर्द के साथ, पर सच्चाई के साथ।
जब तक जेब भरी थी सब अपने थे,
खाली होते ही सारे पराए हो गए।
रिश्ते अब दिल से नहीं, हिसाब से बनते हैं,
फायदा दिखे तभी लोग साथ चलते हैं।
पैसा हाथ में था तो हर कोई पास था,
पैसा जाते ही सबका असली रंग दिखा।
यहां रिश्ते नहीं, ज़रूरतें निभाई जाती हैं,
मतलब खत्म तो पहचान भी खत्म हो जाती है।
दुनिया की रीत अजीब है यारों,
यहां इंसान नहीं, हैसियत देखी जाती है।
मुश्किल वक़्त में सब साथ छोड़ गए,
सिर्फ पैसा था जो कभी साथ नहीं छोड़ता।
जिनको अपना समझा था दिल से,
वही सबसे पहले मतलब निकाल गए।
आजकल मोहब्बत भी शर्तों पर होती है,
बिना फायदे के यहां कोई साथ नहीं देता।
दौलत देखकर लोग रिश्ता निभाते हैं,
दिल की कद्र करने वाले अब कम ही बचे हैं।
जब तक काम था तब तक इज़्ज़त थी,
काम निकलते ही सलाम भी खत्म हो गया।
अब रिश्ते कागज़ के नोट जैसे हो गए हैं,
जितनी कीमत उतनी ही अहमियत रह गई है।
जिस दिन गरीब हुआ, सब भूल गए मुझे,
यही तो असली चेहरा है इस दुनिया का।
खून के रिश्तों में भी हिसाब हो गया,
पैसे की चमक ने सब रिश्ते धुंधले कर दिए।
सच्चाई कड़वी है पर सच यही है,
इंसान नहीं, यहां पैसा पूजा जाता है।
वक़्त पड़ने पर सब पहचान गए मैंने,
कौन सच्चा है और कौन बस मतलबी।
जहां लोग सिर्फ फायदा देखते हैं,
वहां सच्ची मोहब्बत ढूंढना मुश्किल है।
मुस्कुराते चेहरों के पीछे मतलब छुपे हैं,
यही तो है इस दुनिया की असली पहचान।
अपनों ने ही जब पीठ दिखा दी,
तब समझ आया दुनिया कितनी मतलबी है।
जिस दुनिया में पैसा ही भगवान है,
वहां इंसानियत ढूंढना बेकार है।
बचपन के दोस्त भी बदल जाते हैं,
जब बीच में पैसों का मामला आ जाता है।
यहां दिल की कीमत कोई नहीं देता,
बस बैंक बैलेंस देखकर रिश्ता बनता है।
जिस दिन कामयाब हुआ, सब पास आए,
पर जब ज़रूरत थी, कोई नज़र नहीं आया।
पैसों की चमक में लोग अंधे हो गए,
रिश्तों की असली कीमत भूल गए सब।
इस मतलबी दुनिया में सीख ली है यह बात,
अपनी कद्र खुद करो, कोई और नहीं करेगा।

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