Shayari Blog Sad Shayari Haryanvi दिल की पीड़ आपणी भाषा म्ह — म्हारी माटी, म्हारा दर्द दर्द जिब्बे सबतै ...
दर्द जिब्बे सबतै ज्यादा गहरा लागै, जिब वो आपणी बोली म्ह कह्या जावै। हरियाणवी की मिट्टी म्ह जो अपणापण सै, वो किसे और भाषा म्ह कोणी मिलदा। इस टूटे दिल की बात ताहीं जिब्बे म्हारी अपणी बोली मिलै, तो दर्द भी सीधा दिल ताहीं पहुंच जावै।
जिसनै छोड़ दिया, जिसतैं बिछड़ गे, उसकी याद जिब आवै तो शब्द कम पड़ जावैं। पर हरियाणवी की सीधी-सादी बोली म्ह वो दर्द भी अपणा-सा लागै। ना कोए दिखावा, ना कोए बनावट — बस सीधे दिल की बात।
ये शायरी उन सारे दिलां ताहीं समर्पित सै जो बिछड़न का दर्द झेल रहे सैं, अर जिनका दर्द शब्दां म्ह कोणी समा पावै। म्हारी माटी की जुबां म्ह, म्हारा दर्द थारे ताहीं।
The Collection
01 / 24
थारे बिना गाम भी सूना सै,
दिल का हर कोना अधूरा सै।
दिल का हर कोना अधूरा सै।
02 / 24
बिछड़ के भी याद घणी सतावै,
हर सांझ थारी सूरत ल्यावै।
हर सांझ थारी सूरत ल्यावै।
03 / 24
जो टूट गया वो दिल कहूं सुधरै,
बस आंसू ए साथी बणकै रहवै।
बस आंसू ए साथी बणकै रहवै।
04 / 24
रात कटै कोन्या, नींद उड़ी सै,
थारी याद म्ह दुनिया छुटी सै।
थारी याद म्ह दुनिया छुटी सै।
05 / 24
दर्द छुपाणा आगी म्हनै,
हांसी के पीछे रोणा सीखग्या म्हनै।
हांसी के पीछे रोणा सीखग्या म्हनै।
06 / 24
जिब्बे याद आवै थारा जाणा,
दिल कहवै फेर तै मिल आणा।
दिल कहवै फेर तै मिल आणा।
07 / 24
अपणा कहकै छोड़ दिया जो,
दर्द वोइए सबतै भारी सै।
दर्द वोइए सबतै भारी सै।
08 / 24
आंख्यां म्ह पाणी सूख ग्या,
पर दिल का दर्द कोन्या सूखा।
पर दिल का दर्द कोन्या सूखा।
09 / 24
चिट्ठी भेजी थी दिल की बात,
जवाब कोन्या आया आज ताहीं।
जवाब कोन्या आया आज ताहीं।
10 / 24
गाम की गळी भी सूणी लागै,
जिब तूं ना हो तो मन उदास रहवै।
जिब तूं ना हो तो मन उदास रहवै।
11 / 24
जो साथ चाल्या था कदम-कदम,
वो आज अकेला छोड़ ग्या हरदम।
वो आज अकेला छोड़ ग्या हरदम।
12 / 24
दर्द का बोझ मन म्ह ढोऊं सूं,
फेर भी हांसी का मुखौटा पहरूं सूं।
फेर भी हांसी का मुखौटा पहरूं सूं।
13 / 24
बिछड़ के भी अपणा माण्या था,
थारा जाणा दिल नै तोड़ ग्या।
थारा जाणा दिल नै तोड़ ग्या।
14 / 24
रोज़ शाम ढलदी सूणी-सूणी,
बिन थारे लागै जिंदगी अधूरी।
बिन थारे लागै जिंदगी अधूरी।
15 / 24
वादे तो घणे करे थे थमनै,
निभाया कोए ना उनम्ह तैं।
निभाया कोए ना उनम्ह तैं।
16 / 24
दर्द बताऊं तो किसनै बताऊं,
अपणे भी सुण के मुंह फेर ल्यावैं।
अपणे भी सुण के मुंह फेर ल्यावैं।
17 / 24
जो कदे साथ छांव म्ह बैठा करते,
आज धूप म्ह अकेला भटकूं सूं।
आज धूप म्ह अकेला भटकूं सूं।
18 / 24
टूटे सपनां का बोझ भारी सै,
हर रात आंख्यां भर आवैं सारी सै।
हर रात आंख्यां भर आवैं सारी सै।
19 / 24
जिब्बे थारा नाम कोए लेवै,
दिल का दर्द फेर तैं ताज़ा हो जावै।
दिल का दर्द फेर तैं ताज़ा हो जावै।
20 / 24
बिछड़ न की पीड़ किस्नै बताऊं,
खुद तैं ए रोज़ लड़ता जाऊं।
खुद तैं ए रोज़ लड़ता जाऊं।
21 / 24
दिल टूट्या तो आवाज़ ना आई,
बस अंदर ए अंदर सब बिखर ग्या।
बस अंदर ए अंदर सब बिखर ग्या।
22 / 24
जो अपणा था वो पराया होग्या,
दर्द का ये रिश्ता सबतै गहरा होग्या।
दर्द का ये रिश्ता सबतै गहरा होग्या।
23 / 24
थारे बिना हर त्यौहार सूना सै,
दिल का हर कोना बस रोणा सै।
दिल का हर कोना बस रोणा सै।
24 / 24
दर्द भी अपणा, यादां भी अपणी,
बस तूं ए ना रहया मेरे धोरै अपणी।
बस तूं ए ना रहया मेरे धोरै अपणी।

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