Shayari Blog School Ki Shayari वो बचपन के दिन, वो स्कूल की यादें — दो लाइनों में स्कूल का नाम सुनते ही ...
स्कूल का नाम सुनते ही सबसे पहले याद आती है वो टिफिन की चोरी, वो दोस्तों के साथ छुपकर की गई शरारतें, और वो घंटी बजते ही क्लास से बाहर भागना। वो दिन आसान नहीं लगते थे, पर आज सोचो तो वही सबसे हल्के और सबसे प्यारे दिन थे।
न कोई टेंशन थी काम की, न कोई फिक्र कल की — बस दोस्ती, मस्ती और थोड़ी सी पढ़ाई से भरी ज़िंदगी थी। टीचर की डांट भी अब मुस्कुराहट बन जाती है, और वो पुरानी बेंच आज भी दिल के किसी कोने में रखी है।
यह शायरी उन्हीं सुनहरे स्कूल के दिनों को समर्पित है — हर उस पल को जो हमें बड़ा तो कर गया, पर अंदर से आज भी बच्चा ही रख गया।
The Collection
01 / 24
स्कूल की वो बेंच अब भी याद है,
हर शरारत का हिसाब अब भी याद है।
हर शरारत का हिसाब अब भी याद है।
02 / 24
टिफिन बंटता था दोस्तों में,
प्यार बसता था उन लम्हों में।
प्यार बसता था उन लम्हों में।
03 / 24
घंटी बजी तो भाग गए सब,
क्लास से बाहर आज़ाद हुए सब।
क्लास से बाहर आज़ाद हुए सब।
04 / 24
होमवर्क कभी पूरा नहीं हुआ,
पर यारों का साथ अधूरा नहीं हुआ।
पर यारों का साथ अधूरा नहीं हुआ।
05 / 24
टीचर की डांट में भी प्यार था,
वो स्कूल का हर दिन खास था।
वो स्कूल का हर दिन खास था।
06 / 24
यूनिफॉर्म पहन के चले थे रोज़,
बचपन का था वो सुनहरा दौर।
बचपन का था वो सुनहरा दौर।
07 / 24
क्लास में पीछे बैठ के हंसना,
वो भी था एक हुनर अपना।
वो भी था एक हुनर अपना।
08 / 24
परीक्षा का डर सबको होता था,
पर दोस्तों संग हल्का लगता था।
पर दोस्तों संग हल्का लगता था।
09 / 24
रिसेस की घंटी सबसे प्यारी थी,
दोस्तों की महफ़िल सबसे न्यारी थी।
दोस्तों की महफ़िल सबसे न्यारी थी।
10 / 24
ब्लैकबोर्ड पे लिखी हर इबारत,
आज भी दिल में है वो इबादत।
आज भी दिल में है वो इबादत।
11 / 24
पहली बेंच वालों की इज़्ज़त अलग थी,
पर आख़िरी बेंच की मस्ती अलग थी।
पर आख़िरी बेंच की मस्ती अलग थी।
12 / 24
कॉपी में नोट्स कम, किस्से ज़्यादा थे,
वो स्कूल के दिन सच में प्यारे थे।
वो स्कूल के दिन सच में प्यारे थे।
13 / 24
असेंबली में खड़े थे सब कतार में,
दोस्ती पक्की होती थी उस बहार में।
दोस्ती पक्की होती थी उस बहार में।
14 / 24
पेंसिल उधार लेना आदत थी,
वो छोटी-छोटी बातें ही राहत थी।
वो छोटी-छोटी बातें ही राहत थी।
15 / 24
स्पोर्ट्स डे की वो दौड़ अभी तक याद है,
हारना भी तब खुशी की बात थी।
हारना भी तब खुशी की बात थी।
16 / 24
फेयरवेल की वो शाम उदास थी,
पर यादों में अब भी वो पास थी।
पर यादों में अब भी वो पास थी।
17 / 24
क्लासरूम की खिड़की से झांकना,
बारिश में भीगने का मन बनाना।
बारिश में भीगने का मन बनाना।
18 / 24
जो दोस्त तब साथ बैठा करते थे,
अब बस यादों में मिला करते हैं।
अब बस यादों में मिला करते हैं।
19 / 24
एग्ज़ाम हॉल की खामोशी में भी,
एक हंसी छुपी होती थी किसी में।
एक हंसी छुपी होती थी किसी में।
20 / 24
स्कूल की घंटी अब नहीं बजती,
पर दिल में अब भी वो गूंजती है।
पर दिल में अब भी वो गूंजती है।
21 / 24
छुट्टी की खबर सबसे बड़ी खुशी थी,
वो मासूम सी दुनिया अपनी थी।
वो मासूम सी दुनिया अपनी थी।
22 / 24
आज बड़े होकर भी लगता है,
वो स्कूल का बस्ता याद आता है।
वो स्कूल का बस्ता याद आता है।
23 / 24
दोस्तों के साथ खाया वो टिफिन,
ज़िंदगी की सबसे मीठी थी वो मंज़िल।
ज़िंदगी की सबसे मीठी थी वो मंज़िल।
24 / 24
स्कूल छूटा तो बचपन भी छूटा,
पर यादों का हर पन्ना अब भी जुड़ा।
पर यादों का हर पन्ना अब भी जुड़ा।

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