```html Shayari Blog Matlabi Pyar Shayari जब प्यार भी शर्तों पर टिका हो — दो लाइनों में सच्चाई कुछ रिश्त...
```html
कुछ रिश्ते सिर्फ ज़रूरत की भाषा समझते हैं — जब तक काम निकले, तब तक साथ; काम निकलते ही दूरी और खामोशी। यह प्रेम की सबसे कड़वी सच्चाई है, पर आज के दौर में यह उतनी ही आम भी हो चुकी है।
जो प्यार सिर्फ फ़ायदे पर टिका हो, वो असली प्यार नहीं, सिर्फ सौदा होता है। समझ में आने के बाद भी दिल को समझाना मुश्किल होता है कि जिसे अपना समझा, वो बस अपनी ज़रूरत तक ही अपना था।
यह शायरी उन सभी दिलों के लिए है जिन्होंने मतलबी रिश्तों का दर्द सहा है — जिन्होंने सच्चा प्यार दिया, पर बदले में सिर्फ धोखा पाया।
The Collection
01 / 24
काम निकलते ही पहचान भूल गए,
यही तो असली औकात दिखा गए।
यही तो असली औकात दिखा गए।
02 / 24
मतलब से प्यार करना सीख गए हो,
दिल से नहीं, फ़ायदे से जीना सीख गए हो।
दिल से नहीं, फ़ायदे से जीना सीख गए हो।
03 / 24
ज़रूरत तक अपना कहते रहे तुम,
ज़रूरत बीती तो बेगाना कहा तुमने।
ज़रूरत बीती तो बेगाना कहा तुमने।
04 / 24
प्यार नहीं था वो, सौदा था बस,
अब समझ आया हर वादा झूठा था बस।
अब समझ आया हर वादा झूठा था बस।
05 / 24
जिसे दिल से अपनाया था हमने,
वो बस मतलब का यार निकला।
वो बस मतलब का यार निकला।
06 / 24
फ़ायदे तक साथ निभाया तुमने,
बाकी सब झूठा दिखाया तुमने।
बाकी सब झूठा दिखाया तुमने।
07 / 24
सच्चे दिल से प्यार किया था हमने,
बदले में बस धोखा पाया हमने।
बदले में बस धोखा पाया हमने।
08 / 24
जो सिर्फ फ़ायदे में साथ रहे,
वो मतलबी रिश्ते कहलाए सदा।
वो मतलबी रिश्ते कहलाए सदा।
09 / 24
प्यार का मुखौटा पहन के आए थे,
असल में बस मतलब लेने आए थे।
असल में बस मतलब लेने आए थे।
10 / 24
जब तक फ़ायदा था तब तक अपना कहा,
अब मुड़कर भी ना देखा तुमने।
अब मुड़कर भी ना देखा तुमने।
11 / 24
दिल दिया था बिना किसी शर्त के,
बदले में मिला बस स्वार्थ ही स्वार्थ।
बदले में मिला बस स्वार्थ ही स्वार्थ।
12 / 24
जो मतलब निकलते ही बदल जाए,
वो प्यार नहीं, बस नाटक कहलाए।
वो प्यार नहीं, बस नाटक कहलाए।
13 / 24
तुम्हारा प्यार शर्तों पे टिका था,
हमारा प्यार सच्चा और बेशर्त था।
हमारा प्यार सच्चा और बेशर्त था।
14 / 24
जिसे अपना समझ के भरोसा किया,
उसने बस अपनी ज़रूरत को जिया।
उसने बस अपनी ज़रूरत को जिया।
15 / 24
मतलबी रिश्तों की यही पहचान है,
काम निकलते ही खत्म हर बयान है।
काम निकलते ही खत्म हर बयान है।
16 / 24
प्यार में स्वार्थ ढूंढने वालों से,
बेहतर है तन्हा रहना इस जहां से।
बेहतर है तन्हा रहना इस जहां से।
17 / 24
जिसने सिर्फ लेना सीखा हो,
वो प्यार निभाना कभी ना सीखा हो।
वो प्यार निभाना कभी ना सीखा हो।
18 / 24
वक्त पड़ने पे साथ ना जो दे,
वो रिश्ता सिर्फ मतलब का ही रहे।
वो रिश्ता सिर्फ मतलब का ही रहे।
19 / 24
जो प्यार सिर्फ फ़ायदे से जुड़ा हो,
वो कभी दिल से जुड़ा ना हो।
वो कभी दिल से जुड़ा ना हो।
20 / 24
सच्चा प्यार तलाशा था हमने,
मिला बस मतलब का सौदा हमने।
मिला बस मतलब का सौदा हमने।
21 / 24
जो सिर्फ ज़रूरत में याद आए,
वो प्यार नहीं, इस्तेमाल कहलाए।
वो प्यार नहीं, इस्तेमाल कहलाए।
22 / 24
भरोसा टूटा तो समझ आया,
तुम्हारा प्यार बस मतलब का साया।
तुम्हारा प्यार बस मतलब का साया।
23 / 24
जो रिश्ता सिर्फ लेन-देन पे टिके,
वो कभी दिल से ना निभे।
वो कभी दिल से ना निभे।
24 / 24
मतलबी दुनिया में सच्चा प्यार ढूंढा,
पर मिला बस स्वार्थ का हर एक चेहरा।
पर मिला बस स्वार्थ का हर एक चेहरा।

COMMENTS